छह पारमिताएँ – बोधिसत्त्व मार्ग की आधारशिला
छह पारमिताएँ – बोधिसत्त्व मार्ग की आधारशिला प्रस्तावना महायान बौद्ध धर्म में बोधिसत्त्व आदर्श को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। बोधिसत्त्व वह साधक है जो केवल अपनी मुक्ति के लिए नहीं, बल्कि समस्त प्राणियों के कल्याण और मुक्ति के लिए साधना करता है। वह तब तक अंतिम निर्वाण में प्रवेश नहीं करता जब तक सभी प्राणी दुःख से मुक्त न हो जाएँ। बोधिसत्त्व मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए महायान परंपरा छह महान गुणों या "षट् पारमिताओं" का अभ्यास सिखाती है। "पारमिता" का अर्थ है पूर्णता या ऐसा गुण जो साधक को संसार के बंधनों से पार ले जाए। ये छह पारमिताएँ हैं: दान पारमिता शील पारमिता क्षांति पारमिता वीर्य पारमिता ध्यान पारमिता प्रज्ञा पारमिता इन छह गुणों का विकास साधक को बुद्धत्व की दिशा में आगे बढ़ाता है और उसे करुणा, ज्ञान तथा आत्मिक परिपक्वता प्रदान करता है। 1. दान पारमिता – उदारता और निस्वार्थ दान दान पारमिता बोधिसत्त्व मार्ग की पहली और सबसे महत्वपूर्ण पारमिता मानी जाती है। दान का अर्थ केवल धन देना नहीं है। बौद्ध धर्म में दान तीन प्रकार का माना गया है: आमिष दान (भौतिक वस्तुओं का दान) अभय ...