अष्टांगिक मार्ग – बुद्ध का व्यावहारिक मुक्ति मार्ग
अष्टांगिक मार्ग – बुद्ध का व्यावहारिक मुक्ति मार्ग प्रस्तावना बौद्ध धर्म का मूल उद्देश्य मनुष्य को दुःख से मुक्त करना और उसे शांति, ज्ञान तथा निर्वाण की ओर ले जाना है। भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद जो शिक्षाएँ दीं, उनमें "चार आर्य सत्य" और "आर्य अष्टांगिक मार्ग" सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अष्टांगिक मार्ग केवल धार्मिक सिद्धांत नहीं है, बल्कि जीवन जीने की एक व्यावहारिक पद्धति है। यह ऐसा मार्ग है जो व्यक्ति को नैतिकता, मानसिक अनुशासन और प्रज्ञा के माध्यम से आंतरिक परिवर्तन की ओर ले जाता है। थेरवाद बौद्ध धर्म में अष्टांगिक मार्ग साधना का आधार माना जाता है। यह मार्ग साधक को लोभ, क्रोध, मोह और अज्ञान से मुक्त कर निर्वाण की दिशा में अग्रसर करता है। भगवान बुद्ध ने बताया कि दुःख का अंत संभव है और उस अंत तक पहुँचने का साधन यही अष्टांगिक मार्ग है। यह मार्ग किसी विशेष जाति, धर्म या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए है। अष्टांगिक मार्ग क्या है? अष्टांगिक मार्ग (Noble Eightfold Path) आठ अंगों वाला मार्ग है जो व्यक्ति के विचार, व्यवहार और चेतना को शुद्ध क...