अवलोकितेश्वर और करुणा मंत्र – महायान एवं वज्रयान बौद्ध धर्म में करुणा का सर्वोच्च प्रतीक
अवलोकितेश्वर और करुणा मंत्र – महायान एवं वज्रयान बौद्ध धर्म में करुणा का सर्वोच्च प्रतीक प्रस्तावना बौद्ध धर्म की महायान और वज्रयान परंपराओं में अवलोकितेश्वर को करुणा का सर्वोच्च बोधिसत्त्व माना जाता है। वे उन महान आध्यात्मिक आदर्शों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सभी प्राणियों के दुःख को समझने और उनके कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। तिब्बती बौद्ध धर्म में अवलोकितेश्वर को "चेनरेज़िग" (Chenrezig) कहा जाता है, जबकि चीन में वे "गुआनयिन" और जापान में "कन्नोन" के नाम से प्रसिद्ध हैं। अवलोकितेश्वर का नाम करुणा, प्रेम, सहानुभूति और निस्वार्थ सेवा का पर्याय माना जाता है। उनके साथ जुड़ा प्रसिद्ध मंत्र "ॐ मणि पद्मे हूँ" विश्व के सबसे लोकप्रिय बौद्ध मंत्रों में से एक है। यह मंत्र केवल धार्मिक जप नहीं बल्कि करुणा और आंतरिक परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। अवलोकितेश्वर कौन हैं? संस्कृत में "अवलोकितेश्वर" का अर्थ है: "वह जो संसार के प्राणियों की पुकार को करुणा से सुनता है।" महायान बौद्ध धर्म के अनुसार अवलोकितेश्वर एक बोधिसत्त्...