शुक्राणु वृद्धि के लिए एक प्रभावी आयुर्वेदिक योग: जीरो स्पर्म से मुक्ति का मार्ग?
पुरुषों में शुक्राणु की कमी (ओलिगोस्पर्मिया) या शुक्राणुहीनता (अजूस्पर्मिया) आज एक आम समस्या बनती जा रही है। आयुर्वेद में इस समस्या के लिए कई प्रभावी जड़ी-बूटी-आधारित समाधान मौजूद हैं। निम्नलिखित योग एक ऐसा ही समग्र उपाय है, जिसे "वृष्य" (पौरुषत्ववर्धक) और "शुक्रल" (शुक्राणुवर्धक) जड़ी-बूटियों के संयोजन से तैयार किया गया है। ✅ योग की सामग्री एवं मात्रा: 1. अश्वगंधा - 100 ग्राम 2. शतावरी - 100 ग्राम 3. सफेद मूसली - 100 ग्राम 4. कांच बीज (कैंच के बीज) - 100 ग्राम 5. बिनोली की गिरी (चारोली/चिरोंजी) - 240 ग्राम 6. शिवलिंगी बीज - 300 ग्राम कुल योग: लगभग 940 ग्राम बारीक चूर्ण। ✅ बनाने व सेवन की विधि: 1. सभी जड़ी-बूटियों को एक साथ मिलाकर बारीक पीस लें और किसी एयरटाइट डब्बे में संरक्षित कर लें। 2. सेवन विधि: सुबह-शाम 5-5 ग्राम (लगभग 1 चम्मच) चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ लें। 3. समय: भोजन के बाद या पहले, नियत समय पर ले सकते हैं। 4. अवधि: नियमित रूप से कम से कम 3-4 महीने तक लगातार सेवन करें। परिणामों के लिए धैर्य रखें। ✅ आहार एवं परहेज (बहुत महत्वपूर्ण): · परहेज: ख...