विधारा: बुढ़ापे की लाठी यानी प्रकृति का अद्भुत कायाकल्प टॉनिक
विधारा: बुढ़ापे की लाठी यानी प्रकृति का अद्भुत कायाकल्प टॉनिक आयुर्वेद के ग्रंथों में एक ऐसी चमत्कारी लता का वर्णन है, जिसे ‘वृद्धदारुक’ यानी ‘बुढ़ापे की लाठी’ कहा गया है। नाम सुनकर ही इसके गुणों का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह लता है ‘विधारा’। समुद्रतट से लेकर जंगलों तक में पाई जाने वाली यह सदाबहार बेल कई नामों से जानी जाती है: घावपत्ता, समुद्रशोख, हाथीलता, एलीफेंट क्रीपर, और चंद्रपदा। इसके पान के आकार के पत्ते और बैंगनी रंग के कोमल फूल देखने में भले ही साधारण लगें, लेकिन आयुर्वेद में इसे एक संपूर्ण ‘रसायन’ (कायाकल्प करने वाली औषधि) माना गया है। क्या है विधारा? विधारा भारतीय उपमहाद्वीप की देशज लता है जो खुद-ब-खुद उगकर फैलती है। इसकी खासियत है इसकी ऊनी या रेशमी टहनियाँ और चौड़े पत्ते। आयुर्वेद के अनुसार, यह स्वाद में कड़वी, तीखी और गर्म प्रकृति की है। यह कफ तथा वात दोष को शांत करने वाली, पाचन अग्नि को प्रज्वलित करने वाली और शरीर की सातों धातुओं को पुष्ट करने वाली मानी गई है। "बुढ़ापे की लाठी" क्यों कहा गया? इस उपाधि का रहस्य इसके एंटी-एजिंग (रसायन) गुणों में छुपा है। ऐसा माना ...