वज्रयान बौद्ध धर्म क्या है? तंत्र, मंत्र, मंडल और कालचक्र तंत्र का संपूर्ण परिचय
READ FULL STORY → वज्रयान बौद्ध धर्म: तंत्र, मंत्र और शीघ्र बुद्धत्व का मार्ग प्रस्तावना बौद्ध धर्म की तीन प्रमुख शाखाओं—थेरवाद, महायान और वज्रयान—में वज्रयान को सबसे गूढ़, रहस्यमय और उन्नत साधना परंपरा माना जाता है। इसे तांत्रिक बौद्ध धर्म, मंत्रयान, गूढ़यान और वज्रमार्ग के नाम से भी जाना जाता है। वज्रयान का विकास भारत में महायान परंपरा के भीतर हुआ और बाद में यह तिब्बत, भूटान, नेपाल, मंगोलिया तथा हिमालयी क्षेत्रों में फैल गया। वज्रयान की विशेषता यह है कि यह बुद्धत्व प्राप्त करने के लिए मंत्र, मुद्रा, मंडल, देवता योग और गुरु परंपरा जैसी विशेष साधनाओं का उपयोग करता है। वज्रयान के अनुसार उचित गुरु, सही साधना और गहन अभ्यास के माध्यम से साधक एक ही जीवन में बुद्धत्व प्राप्त कर सकता है। वज्रयान का अर्थ "वज्रयान" दो शब्दों से मिलकर बना है: वज्र = अटूट शक्ति, हीरा, अविनाशी सत्य यान = मार्ग या वाहन अर्थात: "अविनाशी ज्ञान का मार्ग" वज्रयान में वज्र बुद्धत्व, प्रज्ञा और परम सत्य का प्रतीक है। वज्रयान का उद्भव वज्रयान का विकास लगभग 6वीं से 8वीं शताब्दी ईस्वी के बीच भारत में ह...