थेरवाद बौद्ध धर्म क्या है? इतिहास, अरहंत आदर्श और पाली त्रिपिटक का संपूर्ण परिचय
थेरवाद बौद्ध धर्म: इतिहास, दर्शन और साधना का संपूर्ण परिचय प्रस्तावना बौद्ध धर्म की अनेक परंपराओं में थेरवाद बौद्ध धर्म को सबसे प्राचीन और मूल परंपरा माना जाता है। यह आज भी भगवान बुद्ध की प्रारंभिक शिक्षाओं को संरक्षित रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण शाखा है। थेरवाद का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को दुःख, मोह और अज्ञान से मुक्त करके निर्वाण की ओर ले जाना है। आज श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया और लाओस सहित दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के करोड़ों लोग थेरवाद परंपरा का पालन करते हैं। थेरवाद का अर्थ "थेरवाद" शब्द पाली भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है: थेर (Thera) = वरिष्ठ आचार्य या प्राचीन गुरु वाद (Vada) = परंपरा या शिक्षण अर्थात: "प्राचीन आचार्यों का मार्ग" थेरवाद स्वयं को बुद्ध और उनके प्रथम शिष्यों की मूल शिक्षाओं का संरक्षक मानता है। थेरवाद का इतिहास भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके शिष्यों ने उनकी शिक्षाओं को सुरक्षित रखने के लिए कई बौद्ध संगीति (काउंसिल) आयोजित कीं। लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में Ashoka के शासनकाल में बौद्ध धर्म का व...