भटेउर: वो जंगली झाड़ी जिसके पत्ते रोकते हैं ख़ून और जिसके फूल दिखाते हैं वसंत का आगाज
भटेउर: वो जंगली झाड़ी जिसके पत्ते रोकते हैं ख़ून और जिसके फूल दिखाते हैं वसंत का आगाज सड़क के किनारे धूल फाँकती, लोगों की नज़रों से ओझल, एक साधारण-सी झाड़ी खड़ी है। उस पर न तो कोई मनमोहक फल लगे हैं, न ही उसका आकार किसी बगीचे की शोभा बढ़ाने लायक है। वह बस है—जंगली, बिन बुलायी, और अपने आप में मस्त। हम में से ज़्यादातर उसे कभी पहचानते तक नहीं। पर आयुर्वेद के पुरातन ग्रंथ #भैषज्य_रत्नावली के पन्नों में, और आदिवासी समुदायों के सदियों पुराने ज्ञान में, यही झाड़ी एक #भटेउर के नाम से खजाने की तरह दर्ज है। यह नाम शायद आपके लिए नया हो, और यही इसकी सबसे बड़ी विडम्बना भी है। क्योंकि यह वनस्पति, जिसे हम 'सामान्य' समझ कर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, वही प्रकृति का एक अनमोल वरदान है। जानिए इस बिना पूछे उग आए मेहमान को #भटेउर एक जंगली झाड़ी है। यह किसी की मर्जी का इंतजार नहीं करती। सड़कों के किनारे, खेतों की मेड़ों पर, या वो पड़ी हुई बंजर ज़मीन जहाँ हमारी नज़र ही नहीं जाती, वहाँ यह स्वतः उग आती है। यह अपनी जगह खुद चुनती है और बिना किसी देखभाल के फलती-फूलती है। यह उपेक्षा को, अपनी उपयोगिता से चुनौती...