बौद्ध धर्म के साझा मूल सिद्धांत – चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, कर्म, पुनर्जन्म, निर्वाण और करुणा
बौद्ध धर्म के साझा मूल सिद्धांत – चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, कर्म, पुनर्जन्म, निर्वाण और करुणा प्रस्तावना बौद्ध धर्म विश्व के प्रमुख धर्मों और दर्शन परंपराओं में से एक है। समय के साथ बौद्ध धर्म की विभिन्न शाखाएँ विकसित हुईं, जिनमें थेरवाद, महायान और वज्रयान सबसे प्रमुख हैं। यद्यपि इन परंपराओं के साधना मार्ग, ग्रंथ और कुछ दार्शनिक व्याख्याएँ अलग-अलग हो सकती हैं, फिर भी वे सभी भगवान बुद्ध की मूल शिक्षाओं को स्वीकार करती हैं। विशेष रूप से थेरवाद और महायान परंपराएँ कुछ मूल सिद्धांतों पर समान रूप से आधारित हैं। इनमें चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, कर्म सिद्धांत, पुनर्जन्म, निर्वाण, करुणा और नैतिकता प्रमुख हैं। यही शिक्षाएँ बौद्ध धर्म की नींव बनाती हैं। 1. चार आर्य सत्य चार आर्य सत्य बुद्ध की प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाओं में गिने जाते हैं। ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध ने सारनाथ में अपने प्रथम उपदेश में इन सत्यों का वर्णन किया। पहला आर्य सत्य – दुःख बुद्ध ने कहा कि संसार में दुःख विद्यमान है। जन्म, बुढ़ापा, बीमारी, मृत्यु, वियोग और असंतोष सभी दुःख के रूप हैं। इसका अर्थ निराशाव...