बौद्ध ज्योतिष: इतिहास, परंपरा और बौद्ध धर्म में इसका स्थान
बौद्ध ज्योतिष: इतिहास, परंपरा और बौद्ध धर्म में इसका स्थान परिचय बौद्ध धर्म का मूल आधार बुद्ध द्वारा सिखाया गया धर्म, ध्यान, प्रज्ञा और करुणा है। बौद्ध दर्शन कर्म, प्रतीत्यसमुत्पाद (परस्पर कारणता) और आत्म-विकास पर जोर देता है। फिर भी इतिहास के दौरान विभिन्न बौद्ध संस्कृतियों में ज्योतिष का विकास हुआ, विशेष रूप से तिब्बती बौद्ध परंपरा में। इसी कारण आज "बौद्ध ज्योतिष" एक रोचक विषय माना जाता है। बहुत से लोग यह प्रश्न पूछते हैं कि क्या ज्योतिष वास्तव में बौद्ध धर्म का हिस्सा है? क्या बुद्ध ने ग्रह-नक्षत्रों पर विश्वास किया था? और तिब्बती बौद्ध परंपरा में ज्योतिष का इतना महत्व क्यों है? इन प्रश्नों का उत्तर समझने के लिए हमें बौद्ध धर्म के इतिहास और उसके विकास को देखना होगा। क्या बौद्ध धर्म में ज्योतिष है? संक्षिप्त उत्तर है – मूल बौद्ध धर्म में ज्योतिष केंद्रीय शिक्षा नहीं है। बुद्ध ने मुक्ति का मार्ग ध्यान, नैतिकता और ज्ञान को बताया। उन्होंने यह नहीं सिखाया कि ग्रह-नक्षत्र मनुष्य के भाग्य को पूर्ण रूप से नियंत्रित करते हैं। फिर भी समय के साथ विभिन्न बौद्ध संस्कृतियों ने ज्य...