वज्रयान बौद्ध धर्म की विशेष साधनाएँ – मंत्र, मुद्रा, मंडल, देवता योग और कालचक्र तंत्र
वज्रयान बौद्ध धर्म की विशेष साधनाएँ – मंत्र, मुद्रा, मंडल, देवता योग और कालचक्र तंत्र प्रस्तावना बौद्ध धर्म की विभिन्न परंपराओं में वज्रयान को सबसे गूढ़ और उन्नत साधना मार्ग माना जाता है। इसे तांत्रिक बौद्ध धर्म, मंत्रयान अथवा गुप्तयान भी कहा जाता है। वज्रयान का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि साधक की चेतना का रूपांतरण और शीघ्र बुद्धत्व प्राप्ति है। वज्रयान परंपरा का विकास भारत में हुआ और बाद में यह तिब्बत, नेपाल, भूटान, मंगोलिया तथा हिमालयी क्षेत्रों में फैल गया। इस परंपरा में अनेक विशिष्ट साधनाएँ विकसित हुईं, जिनमें मंत्र, मुद्रा, मंडल, देवता योग और कालचक्र तंत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इन साधनाओं का उद्देश्य साधक के मन, वाणी और शरीर को शुद्ध करके उसे बुद्धत्व की ओर अग्रसर करना है। वज्रयान का अर्थ "वज्र" का अर्थ है हीरा या अटूट शक्ति। "यान" का अर्थ है मार्ग या वाहन। इस प्रकार वज्रयान का अर्थ है: "अटूट ज्ञान और शक्ति का मार्ग।" वज्रयान के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के भीतर बुद्धत्व का बीज पहले से विद्यमान है। उचित साधना द्वारा उसे जागृत किया ज...